Zee News DNA: शराब घोटाले में केजरीवाल कोर्ट से बरी, कोर्ट ने क्या-क्या कहा? Delhi Liquor Policy Case। Zee
शराब घोटाल में केजरीवाल कोर्ट
से बरी, कोर्ट ने क्या-क्या कहा ?
DNA मित्रो, आज देश में आंसू ट्रेंड कर रहे हैं. दुख के मौके पर आंख से आंसू निकलना स्वाभाविक है. लेकिन कई बार आंसू खुशी और संवेदना का प्रदर्शन भी करते हैं. आज जो आंसू ट्रेंड कर रहे हैं उन्हें खुशी, पीड़ा से मुक्ति, बेगुनाही का चिन्ह और न्याय का प्रतीक बताया जा रहा है। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने लिखा है कि आंसू कमजोरी नहीं, संवेदना की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति हैं।
आज हम, संवेदना की सच्ची अभिव्यक्ति बताए जा रहे इन्हीं आसुंओं का विश्लेषण करेंगे।
जिसके केंद्र में हैं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया। ईमानदारी को राजनीति का मूल धर्म बतानेवाले अरविंद केजरीवाल को ये राहत CBI के केस में मिली है. ..कोर्ट से राहत मिलने के बाद केजरीवाल की आंखों में आंसू आ गए. केजरीवाल के समर्थक इसे बेगुनाही के आंसू कह रहे हैं। और केजरीवाल के विरोधी, इन आंसुओं से डरे हुए हैं। ये डर सबसे ज्यादा कहां दिख रहा है, किस खेमे में दिख रहा है और क्यों दिख रहा है? इसका विश्लेषण आज हम विस्तार से करने वाले हैं। लेकिन पहले देखिए..आज खुशी की भावना कैसे आंसू बनकर अरविंद केजरीवाल की आंखों से बही। ये आरोपमुक्त होने की खुशी के आंसू हैं। ये आंसू उस केस से आरोपमुक्त होने के हैं..जिसके लिए सीएम रहते हुए भी केजरीवाल को 177 दिन..दिल्ली की तिहाड़ जेल में काटने पड़े। खुशी के आंसू को डिकोड करने के लिए कोर्ट के फैसले को समझना जरूरी है। मित्रों, दो महीने तक केस के रिकॉर्ड पढ़ने, 300 गवाहों और सभी पक्षों को सुनने के बाद 598 पेज के फैसले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की आबकारी नीति बनाने में कोई साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी..अभियोजन पक्ष यानी सीबीआई का केस न्यायिक जांच पर खरा नहीं उतरता CBI ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन ये ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित थी..
हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं. चार्जशीट में लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया. जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है.कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई.. कोर्ट ने केस की जांच करनेवाले सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए .
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